Friday, December 2, 2016

राष्ट्रिय सशस्त्र प्रहरी बल प्रशिक्षण प्रतिष्ठानका परिचय संक्षेप Hn



 राष्ट्रिय सशस्त्र प्रहरी बल प्रशिक्षण प्रतिष्ठानका परिचय संक्षेप
डा. कृष्ण कुमार तामाङ
कार्यकारी निर्देशक

सशस्त्र प्रहरी बल, नेपाल का पहला अर्धसैनिक संगठन के नाम से जाना जाता है । सुरक्षा के कई पहलुओ में से  शान्ति बहाली और अमनचयन कायम करने में सशस्त्र प्रहरी बल ने अपना अलग सा मकाम बनाया है । देश में चरम असुरक्षा व उग्र अशान्ति बीच स्थापित सशस्त्र प्रहरी बल नें आम नागरिको को सुरक्षा कीे प्रत्याभूती दिलाने में और सरकार की  हाजिरी करने में पिछले १५ सालो की दौरान देश में हुए बहुत सारे बडे महत्ता की सुरक्षा कार्यो में यथेष्ट योगदान की है । सन् २०१५ एप्रिल की विनाशकारी भूकम्प पीडितो की उद्धार में अब्बल दर्जे का दोस्ताना होनें का बखुबी से अन्जाम देने में यह सफल रहा है । सशस्त्र प्रहरी ऐन २०५८ (सन् २००१) द्वारा निर्धारित किए गए कार्याे के सफाई से किए जाने से यह कहना शायद गल्ती ना हो कि लोगों में इस संगठन के प्रति विश्वास और भरोसा का प्रतिरुप दिखते है ।
विज्ञान और प्रविधि कीे विकास के साथ सुरक्षा व्यवस्थापन का कार्य चुनौतीपूर्ण, जटिल व संवेदनशील बन रहे यिन दिनों में सुरक्षाफौज को भी समयानुकुल परिष्कृत तथा परिमार्जित करते हुए  क्षमता प्रवद्र्धन एवम् आधुनिकिकरण उन्मुख होना अपरिहार्यता को सम्वोधन करने राष्ट्रिय सशस्त्र प्रहरी बल प्रशिक्षण प्रतिष्ठान की स्थापना १७ अक्टोबर २००७ को नेपाल सरकार ने सशस्त्र प्रहरी अधीक्षक (एसपी)और फिर ९ जनवरी २००८  को विशिष्ट श्रेणी के सशस्त्र प्रहरी अतिरिक्त महानिरीक्षक (एडिसनल आइजी) को प्रमुख (कार्यकारी निर्देशक) रहने कि
राष्ट्रिय सप्रबल प्रशिक्षण प्रतिष्ठान, काठमाण्डु बादी की दक्षिणपश्चिम, शहर के मध्य भाग से १५ किलोमिटर व सशस्त्र प्रहरी बल हेड क्वाटर स्वयम्भू से ७ किलोमिटर कीे दूरी पर चन्द्रागिरी नगर विकास वडा नं. ११ मातातिर्थ के तीनो ओर से उची पहाडियों के बीच घना जङ्गल से परिवेष्टित मनोरम भूभाग मे बसा है ।
१५ जुन २०१३ को नेपाल सरकार व चीन सरकार के बीच सम्झौते मे हस्ताक्षर होकर २८ नवम्वर २०१४ से ३१८ रोपनी  यानी कि ८२,३०३,६११.२५६८ स्क्वा मि जमीन पर राष्ट्रिय सप्रबल प्रशिक्षण प्रतिष्ठान निर्माण कार्य ने गति लि थी । २६ डिसम्बर २०१४ को सशस्त्र प्रहरी बल मख्यालय में हुए एक समारोह के बीच नेपाल के गृहमन्त्री र चिनि विदेश मन्त्री नें कुल लागत रु.३ अर्ब ६० करोड कीे योजना को मिलकर अन्जाम दिए थे जिस में २६ फरवरी २०१५ को शिलान्यास भी हए थे और मई २०१७ तक निर्माण सम्पन्न करनें की बात तय हई थी ।
सल २०१५ के अन्त्य करिब अन्तर्राष्ट्रिय दक्षिणी सीमा से कुछ समय निर्माण सामग्री नेपाल नहीं आ पाने पर निर्माण कार्य प्रभावित हुआ था फिर भी समय से पहले निर्माण कार्य समपन्न करने की हर सम्भव कोशिश होने से निर्माण प्रमुख इञ्जिनियर दोङ्ग के कथन अनुसार १ अक्टुबर २०१६ तक प्रतिष्ठान का बाहिरी हिस्सा ७५% र आन्तरिक कार्य ७०% सम्पन्न हो चुके हैं । निर्माण प्रारम्भ होने से सम्पन्न होते तक कि अन्तरिम काल में निर्माण स्थल मातातिर्थ से दक्षिण ४ किलोमिटर कि दूरी पर सप्रबल निलबाराही गण, बलम्बु कि परिसर के अन्दर प्रतिष्ठान को मुहैया किया गया घरों से दैनिकी कामकाज व प्रशासनिक कार्य हो रहे हैं ।
राष्ट्रिय सप्रबल प्रशिक्षण प्रतिष्ठान का उद्देश्य व लक्ष्य के तहत सशस्त्र प्रहरी इन्सपेक्टर बेसिक टेनिङ, युवा अधिकारी ट्रेनिङ¸ कम्पनी कमाण्डर व स्टाफ अधिकारी ट्रेनिङ¸ बटालियन कमाण्डर ट्रेनिङ¸ सिनियर कमाण्ड ट्रेनिङ¸ व्यवस्थापन व योजना ट्रेनिङ¸ सुरक्षा व्यवस्थापन ट्रेनिङ¸ और आला दर्जे के व्यवस्थापन ट्रेनिङ, आदि समाहित अन्य व्यवसायिक ट्रेनिङ सारे होंगे । यिन के अलावा, सप्रबलका प्रशिक्षण नीति निर्माण के विषय में परामर्श देने¸ सशस्त्र प्रहरी बल का नीति अनुसार ट्रेनिङ पाठ्यक्रम विकास करने¸ प्रतिष्ठान का जिम्मेवारी क्षेत्रो का मुआयना करना¸ व ट्रेनिङ  एवम् सुरक्षा सम्वद्ध सम सामयिक विषयों के उपर गोष्ठी, कार्यशाला आदि आयोजन कर विश्लेषणात्मक तार्किक राय प्रस्तुत करने होंगे । व्यवसायिक, कुशल व सक्षम जन शक्ति के लिए दिलोजान से समर्पित राष्ट्र सेवको का उत्पादन¸ कौशल अभिमुखिकरण व वृत्ति विकास के योजना और परियोजनाओ के बनाना ट्रेनिङ को नतिजनन, अन्तर्राष्ट्रिय मापदण्ड के बनाना समयानुकुल अध्ययन, अन्वेषण एवम् गवेषणा मिश्रित अनुसन्धान इत्यादि प्रतिष्ठान के जिम्मेवारीयों मे से हैं ।  आगे विदेशी मित्र राष्ट्र व सप्रबल के विज्ञ व शिक्षार्थी अधिकारी गण शैक्षिक कार्यक्रम के आमन्त्रण पर अगर परस्पर भ्रमण आदान प्रदान के लिए आकषर््िात भि हुए तो इसको प्रगती का मानक कहा जा सकता है ।
सशस्त्र प्रहरी नियमावली २०७२ अनुसूची ११(नियम ४८ का उपनियम १) अनुसार प्रमोशन व पेशागत दक्षता अभिवृद्धि के लिए सशस्त्र प्रहरी डिआइजी, सशस्त्र प्रहरी एसएसपी व सशस्त्र प्रहरी अधिक्षक(एसपी) कोे एडभान्स ट्रेनिङ करना अनिवार्य होने से १६ जुन से ०६ जुलाई २०१६ तक सशस्त्र प्रहरी डिआइजी व सशस्त्र प्रहरी एसएसपी सम्मिलित आला दर्जे के व्यवस्थापन ट्रेनिङ व ०६ से ३१ जुलाई २०१६ तक सशस्त्र प्रहरी अधिक्षक का व्यवस्थापन तथा योजना ट्रेनिङ सम्पन्न हुए हैं । प्रतिष्ठान के मौजुदा हालात में भौतिक संरचना के निर्माणाधिन अवस्था व प्राविधिक कठिनाई सहजिकरण हेतु उपरोक्त ट्रेनिङ सशस्त्र प्रहरी बल हेडक्वाटर, स्वयम्भू मे सञ्चालित हुए थे । २२ सेप्टेम्बर २०१६ से सशस्त्र प्रहरी डिएसपी सम्मिलित बटालियन ट्रेनिङ काठमाण्डु बलम्बु स्थित सशस्त्र प्रहरी बल निलबाराही गण कि बन्दोवस्ती सहयोग मे अद्यावधि सञ्चालन में है । गए दिनों बहुत सारी रैंको का बेशिक, उन्नत व प्राविधिक ट्रेनिङ प्रतिष्ठान के तत्वावधान मे समपन्न किए जा चुके हैं । विषयो के ज्ञाता व तद््विषय के अनुभवी जनों के प्रवचन अध्यापन से शिक्षार्थी सशस्त्र प्रहरी अधिकारी गण व्यवसायिक दक्षता एवं व्यवस्थापकिय क्षमता विस्तार क्षेत्र में लाभान्वित हुए हैं ।
राष्ट्रिय सप्रबल प्रशिक्षण प्रतिष्ठान का पृष्ठभूमी व मूलभूत अभिप्राय प्रशिक्षण केन्द्रित रहना है, अपितु देश में आपतकालिन आवश्यकता के क्षण स्टाफ कर्मचारी, शिक्षक और शिक्षार्थी सारे शान्ति सुरक्षाकार्य मे परिचालन करने के  दायरे मे आते है । विपद् व्यवस्थापन¸ दंगा व्यवस्थापन¸ उद्धार कार्य¸ विभिन्न अन्तर्राष्ट्रिय सम्मेलन व अति विशिष्ट महानुभावो के भ्रमण कीे सुरक्षा कार्या में प्रतिष्ठान से जनशक्ति एवं श्रोतसाधन के अधिकतम परिचालन कर उत्तरदायी योगदान का महत्वपुर्ण भूमिका निर्वाह होता आ रहा है ।




प्रकाशित

सशस्त्र प्रहरी विशेषांक
वर्ष १६ अंक १, २७ अक्टोबर २०१६


डा.तामाङ कुछ विषय प्रसंगो पर जैसे प्राकृतिक प्रकोप, महिला व बालबालिका विरुद्ध के अपराध, सुशासन, अन्तर्राष्ट्रिय मानविय कानून, बारुदी सुरुङ्ग एवम् सुरक्षा आदि के प्रशाासनिक तथा व्यवस्थापकिय दृष्टिकोण से यथार्थपरक लेख, तथ्यगत रचना व गवेषणात्मक लेखन मे रुचि रखते है ।
आप ने पिजि (अन्तर्राष्ट्रिय मानविय कानून), स्नातकोत्तर (प्रकोप न्युनिकरण), स्नातकोत्तर (अपराध शास्त्र), एम फिल     (पुलिस प्रशासन) व विद्यावारिधि (जनप्रशासन) किए हैं । देश विदेशो मे किए सुरक्षा व्यवसायिक ट्रेनिङ, संयुक्त राष्ट्रसंघ के शान्ति मिसन, सुरक्षा तथा द्वन्द्व व्यवस्थापन विषयक गोष्ठी आदि अमेरिका, युरोप, एशिया र अफ्रिकी महादेशो सें लिए अनुभव ने आप को कुशल प्राज्ञिक कि पृष्ठभूमी मे खडा होनें मे मदद की है । आप का लेख आदि रचनाऐं

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Saturday, November 26, 2016

କୋସୋଭୋ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟକର୍ମୀ ଔ ନେପାଳ ସନ୍ଦର୍ଭ Or

                                     କୋସୋଭୋ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟକର୍ମୀ ଔ ନେପାଳ ସନ୍ଦର୍ଭ

ଡା. କୃଷ୍ଣ କୁମାର ତାମାଙ


ମାନବ ଶରୀରର କେଊ ଅଙ୍ଗ ସର୍ବାଧିକ ସଂବେଦନଶୀଳ ଯଦି ପ୍ରଶ୍ନ ଉଠେ ସମ୍ଭବତ ଅଧିକାଂଶଙ୍କ ଉତ୍ତର ହେବ ଚକ୍ଷୁ ଚିକିତ୍ସା ବିଜ୍ଞାନ ଏବଂ ସେହି ସାହିତ୍ୟ ଗୁଡିକରେ ଚକ୍ଷୁ ଅନ୍ୟ ଅଙ୍ଗଠାରୁ ଉତ୍କୃଷ୍ଟ ଶ୍ରାବ ଶୋଷକ ବୋଲି କୁହା ଯାଏ । ନାକ ବା ମୁଖ ଅଥବା ଆଉ କେଉ ତରିକାରେ ଯଦି ଶରୀରରେ ତରଳ ପଦାର୍ଥ ପ୍ରବିଷ୍ଟ କରା ଯାଏ ଚକ୍ଷୁ ସବୁ ଠାରୁ କମ ସମୟ ନିଏ । ଚକ୍ଷୁର ସୂକ୍ଷ୍ମ ରକ୍ତବାହିନୀ ନଳିସବୁ ମସ୍ତିସ୍କ ସଙ୍ଗେ ପ୍ରତକ୍ଷ୍ୟ ଗାନ୍ସି ହେବାରୁ ଔଷଧୀର ପ୍ରଭାବ ଚକ୍ଷୁରେ ପଡିଲେ ତାହା ସେହି କ୍ଷଣେ ମସ୍ତିସ୍କରେ ଦେଖା ପଡେ । କେହୁ ରୋଗୀଙ୍କୁ ପରୀକ୍ଷଣ କରିବାକୁ ସର୍ବ ପ୍ରଥମ ଡକ୍ଟର ନିଜର ଚକ୍ଷୁ ଦେଖନ୍ତି ଯାହା ଆମେ ସବୁ ଦେଖି ଆସିଛୁ । ବିମାର ଲୋକଙ୍କ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ଲାଭ ବା ହାନି ଯାହା ହେଲେ ଭି ଚିକିସ୍ତାକର୍ମୀ ଉପରେ ଆରୋପ ଲାଗିବା ସ୍ଵାଭାବିକ ତଥାପି ସେଥିରେ କେହି ଆଂଶିକ ମାତ୍ରାରେ ନିଶ୍ଚୟ ଜିମ୍ମେବାରି ରହିବା କଥା ଗଳତି ନୁହେଁ
            ଇସବୀ ସମ୍ବତ ୨୦୦୧ରେ ଶାନ୍ତି ସ୍ଥାପନଲାଗି ପୂର୍ବ ୟୁଗୋସ୍ଲାଭିୟା ଦେଶ କୋସୋଭୋ (UNMIK - United Nations Interim Mission in Kosovo) ସ୍ଥିତ ସଂଯୁକ୍ତ ରାଷ୍ଟ୍ର ସଂଘ ପୁଲିସ ଅନୁଶିକ୍ଷଣ ତାଳିମକେନ୍ଦ୍ରରେ ମୋତେ ପ୍ରଶିକ୍ଷକ ନିଯୁକ୍ତି ମିଳିବାରୁ ଅଧ୍ୟାପନ କାର୍ଯ୍ୟ କରିବାକୁ ପଡୁଥିଲା ସେଥି ପାଇଁ ମୋର ଅଧିକ ସମୟ କମ୍ପୁଟରରେ ବ୍ୟତିତ ହେବାରୁ ଚକ୍ଷୁ ଲାଲ ଏବଂ ଦ୍ରବିଭୂତ ସାଥିରେ ଜଳନ ସମସ୍ୟା ଦେଖା ପଡିବାରୁ ଚିକିତ୍ସକଙ୍କ ପାଖକୁ ଯାଇ ଥିଲି ସଂଯୁକ୍ତ ରାଷ୍ଟ୍ର ସଂଘ ଚିକିତ୍ସକ ସମୂହରେ ରୁସି ସୈନ୍ୟ ହସ୍ପିଟଲ ଅଧିକାରୀ ଠାରୁ ଅଧିକାଂଶ ଷ୍ଟାଫମାନଙ୍କୁ ଇଂରାଜୀ କଥା ବୁଝିବାକୁ ଓ କହି ପାରିବାକୁ କେହି ନଥିଲେ । ଅଳ୍ପ ସଂଖ୍ୟକ କେହି ମାତ୍ର ଜର୍ମନୀ ଭାଷା କହି ପାରନ୍ତି । ଭାଷା ଅନୁବାଦକଙ୍କ ସହଯୋଗରେ ରୁସି ଚିକିତ୍ସକ ଲେଖା ପ୍ରେସକ୍ରିପସନ ନେଇ ବାଜାର ଯାଇ ମେଡିକାଲ ଷ୍ଟୋରରୁ ଓଷଧୀ ଖରିଦ କରି ଚକ୍ଷୁରେ ପକାଇ ଥିଲି । ଫଳରେ କିଛି ଲାଭ ହେଲା ଭଳି ଲାଗିଲା ନାହିଁ ।  ବରଂ କିଛି ଦେଖି ନପାରି ତାଳିମ କେନ୍ଦ୍ର ପ୍ରଶିକ୍ଷକ ସାଙ୍ଗକୁ ସାଥିରେ ନେଇ ଗତ କାଲିର ହସ୍ପିଟଲ ପହଞ୍ଚି ସେହି ଡକ୍ଟର ଭେଟି ନିଜେ ଦେଇ ଥିବା ପ୍ରେସକ୍ରିପସନ ଆଉ ମେଡିକାଲ ଓଷଧୀ ଓ ବିଲ ନେଇ ଏ ସବୁ କଣ କେମିତି ହେଲା ଦେଖାଇବାରୁ ନୂଆ କଥା ବାହିରି ଆସି ଥିଲା ।
            ଓଷଧୀ ସେବନ ପରେ ପୀଡା କମ ହେବା ବିପରିତ ଆଉ ଅଧିକ ଅବସ୍ଥା ଜଟିଳ କିପରି ହୁଏ ପ୍ରଶ୍ନ କରିବାରୁ ଡକ୍ଟର କହନ୍ତି ଯେ ସେ ଯେଉଁ ପ୍ରେସକ୍ରିପସନ ଲେଖି ଥିଲେ ତାହା ପରି ଓଷଧୀ ନଥିଲା । ପ୍ରେସକ୍ରିପସନ ଲେଖା ବମୋଜିମ ଓଷଧୀ ନଥିବାରୁ ସେ ସବୁ ହେଇ ଥିଲା । ସେହି କ୍ଷଣେ କାଲିର ମେଡିକାଲ ସ୍ଟୋର ପହଞ୍ଚି ଓଷଧୀ ଆଉ ବିଲ ଦେଖାଇ କାହିଁକି ପ୍ରେସକ୍ରିପସନ ଠାରୁ ଭିନ୍ନ ଓଷଧୀ ଦେଇ ଥିଲେ ବୋଲି ବୁଝିବାରୁ ପ୍ରତି ଉତ୍ତରରେ ସେହି କ୍ଷଣେ ସେ ଓଷଧୀ ନଥିବାରୁ ସେହି ପ୍ରକୃତିର ଅନ୍ୟ ଓଷଧୀ ଦେବା କଥା ଜଣା ପଲା ।  
            ଆଶ୍ଚର୍ଯ୍ୟ କଥା ଯେ ଗତ ଛ ମାସ ଠାରୁ ସେ ମହିଳା ଡକ୍ଟର ପ୍ରେସକ୍ରିପସନ ଦେଖି ଓଷଧୀ ବ୍ୟାପାର କରି ଆସୁ ଥିଲେ। । ସେ କେବେ ଚିକିତ୍ସା ବିଷୟରେ ପ୍ରଶିକ୍ଷଣ ବ। ଅଧ୍ୟୟନ କରି ନଥିଲେ । ପ୍ରେସକ୍ରିପସନରେ ଲେଖା ଓଷଧୀ ନଥିବାରୁ ସେହି ଭଳି ଅନ୍ୟ ଓଷଧୀ ସେ କାମ କରିବା ବିଶ୍ଵାସରେ ଦେଇ ଥିଲେ । ଧନ୍ୟ ସେ ନାରୀ ଯେ ଏତେ ମହାନ ଉଦାର ହୃଦଯ ରଖନ୍ତି, ରୋଗୀ କେବେ ଖାଲି ହାତ ନ ଯାଉ ବୋଲି ସେ ନିଜ ବିବେକ ପ୍ରଯୋଗ କରି ଅନ୍ୟ ଓଷଧୀ ଦେଇ ପଠାଉ ଥିଲେ ।
            ସ୍ଥାନୀୟ ପୁଲିସକୁ ଖବର କଲା ପରେ ଗବେଷଣା କରିବାରୁ ନିଜ ସାଥିରେ କୌଣସି କାଗଜ ପତ୍ର ଯେମିତି ନଗରପାଳିକା ସ୍ଵିକୃତି, ମେଡିକାଲ କାଉନ୍ସିଲ ଏବଂ କର କାର୍ଯ୍ୟ।ଳୟ ଭଳି ସରକାରୀ କିଛି ନଥିବାର ଜଣା ପଡିଲା । ଜୀବିକା ଉପାର୍ଜନ କରିବା ବୋଲି କଣ ଯାହା ମନ ଲାଗେ ତାହା କରିବାକୁ କେହି ସ୍ଵତନ୍ତ୍ର ହୁଏନ୍ତି? ଏମିତି ଭାଜି ଖେତି ଭଳି ଦୁକାନ ଖୋଲି ସର୍ବ ସାଧାରଣ ଜନତାଙ୍କ ଜୀବନ ବିପଦରେ ପରି ଓଷଧୀ ବ୍ୟାପାର କରିବା କଥା ବାହାରକୁ ଆସି ଥିଲା । ଆଶ୍ଚର୍ଯ କଥା ଯେ ଦେଶର ଆଇନ କାନୁନ ବିପରୀତ ସେମିତି ଆହୁରି ଓଷଧୀ ଦୁକନମାନେ ଲାଇନ ଲାଗି ଅଛନ୍ତି । ଏଭଳି ବୃହତ ସଂଖ୍ୟାରେ ବିନା ଅନୁମତି, ବିନା କେହି ପ୍ରଶିକ୍ଷଣ ମନଲାଗି ଢଙ୍ଗରେ ଓଷଧୀ ବ୍ୟବସାୟ କରିବା ଲୋକମାନଙ୍କ ବିରୁଦ୍ଧରେ କାନୁନୀ କ୍ରିୟାକଳାପ ରାଷ୍ଟ୍ରୀୟ ସମାଚାରରେ ତରଙ୍ଗ ସୃଷ୍ଟି କରିଥିଲା ।
            ନେପାଳ ସନ୍ଦର୍ଭରେ ୨୦୧୫ ଜାନୁଆରୀ ମାସରେ ନକଲି ଚିକିତ୍ସକ ମାନଙ୍କ ବ୍ୟାପକ ଖେଳ ନେପାଳ ପୁଲିସଦ୍ଵାରା ସାର୍ବଜନିକ ହେବାରୁ ସର୍ବସାଧାରଣ ଜନତାମାନଙ୍କ ହୃଦୟରେ ସୁଶାସନ ପ୍ରତି ଆଶା ଜାଗୃତ ଏବଂ ପ୍ରଶଂସା ଲହର ବିସ୍ତାରିତ ହେଇଛି । ରାଜ୍ୟ ଏବଂ ସରକାରୀ ସଞ୍ଜନ୍ତ୍ରମାନଙ୍କୁ ଜନତାମାନଙ୍କ ସହଯୋଗ, ସୂଚନା ସଦା ସ୍ଵାଗତଯୋଗ୍ୟ ହୁଅନ୍ତି ନେପାଳ କାନୁନ (Country Code of Conduct) ଠଗି ଧାରା ୧ ଆଉ ୨ରେ ସ୍ପଷ୍ଟ ଲେଖା ଅଛି ଯେ ନିଜର ଅଧିକାର ନଥିବା, ଅନ୍ୟର ଅଧିକାର ହେବା ଚଳ ଅଚଳ ସମ୍ପତ୍ତି ଯଦି  କେହି ତାକୁ ଫୁସ୍ଲାଇ ବା ପରିପଞ୍ଚ କରି ଝୁଠା କଥାକୁ ମିଛ କହି ଧୋକା ଦିଇ ନେଇ ବା ଦେଇ ଗଲେ ତାହା ଠଗି ହୁଏ ।   ସେହି ଭଳି ଧାରା ୨ରେ ନିଜର ନାମ ମିଛ କହି ଅନ୍ୟର ନାମରେ ଆପଣ ପରିଚୟରେ ଅନ୍ୟର ନୋକସାନି ଏବଂ ନିଜର ଲାଭ ହେବା କାର୍ଯ୍ୟ ଭି ଠଗି କହା ଯାଇଛି । ଧାରା ୪ରେ ଯଦି ଆରୋପ ପ୍ରମାଣିତ ହୁଏ ତେବେ ସେ ସାମାନର ମୂଲ୍ୟ ଯେତେ ହୁଏ ସେତେ ମୂଲ୍ୟ ଯୋଗ କରି ଜାରିବାନା ଆଉ ଯଦି ସେ ସାମାନର ମୂଲ୍ୟ ନିର୍ଧାରଣ ନହୁଏ ପାଞ୍ଚ ହଜାର ଟଙ୍କା ଜରିବାନା ଆଉ ତା ଉପରେ ପାଞ୍ଚ ବର୍ଷ କଏଦ ହେବା ପ୍ରବଧାନ ଥାଏ । ନକଲି ସାର୍ଟିଫିକେଟ ରେ ସରକାରୀ ଜାଗିର କଲାବଳାଙ୍କୁ ଭ୍ରଷ୍ଟାଚାର ନିବାରଣ ଆଇନ ୨୦୦୨ ଆକୃଷ୍ଟ ହେଇ ପାରନ୍ତି । ସେହି ଭଳି ଓଡିଶାରେ ଭାରତୀୟ ଦଣ୍ଡ ସଂହିତା (Indian Penal Code) ଲାଗୁ ହୁଏ । ଧାରା ୪୨୦ଅନ୍ତର୍ଗତ ଯଦି କେହି କାହାକୁ ମିଛ କହନ୍ତି ବା ଠଗିବା ଉଦ୍ଦେଶ୍ୟ ନେଇ ତଳ ଉପର କରନ୍ତି ତାହା ହୁଏ  ଠଗି (ଫ୍ରଡ) ଆଉ ଦଣ୍ଡ ହେଇ ପାରେ ଜରିବାନା ସଙ୍ଗେ ସାତ ବରଷ କଇଦ ।  
            ନେପାଳର ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ କ୍ଷେତ୍ରରେ ଚିକିତ୍ସକ, ହାୱାଇ ପାଇଲଟ ନକଲି ହେବା, ବୀନା ଲାଇସେନ୍ସ ସାର୍ବଜନୀକ ଗାଡି ଚଳାଇବା, ସରକାରୀ ଅନୁମତି ନେଇ ନପାରିବା ପୁରୁଣା ଏବଂ ପ୍ରୟୋଗ ହେଇ ନପାରିବା ସଡକରେ ଯାତାୟାତ ସଂଚାଳନ କରିବା ଆଦି ଲାପରବାହୀ ଗମ୍ଭୀର ସମସ୍ୟା ଅଟନ୍ତି । ଖାଦ୍ୟାନ୍ନରେ ସମୟ ବ୍ୟତିତ ହେବା, ଦୂଷିତ ପଦାର୍ଥ ଆଉ ନକଲି ଅଖାଦ୍ୟ ବସ୍ତୁ, ଫଳଫୁଲରେ ବିଷାକ୍ତ ଓଷଧୀ ଆଉ ରାସାୟନିକ ମଳ ଦୁରୁପଯୋଗ ସମାଚାର ସବୁ ସାମାନ୍ୟ ହେଇଛନ୍ତି । ପରମ୍ପରା ଏବଂ ଧାର୍ମିକତାରେ ଆଧାରିତ ଆମ ପର୍ବଗୁଡିକରେ ମିଷ୍ଟାନ୍ନ ଏବଂ ମାଂସମତ୍ସ୍ୟ ଖପତ ଉଲ୍ଲେଖ୍ୟ ବୃଦ୍ଧି ହେବାରୁ ଆମ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ସେହି ଅନୁପାତରେ ବଢି ଜୋଖିମଯୁକ୍ତ ହେଇଥାନ୍ତି ସେଥିପାଇଁ ସର୍ବଦା ସତର୍କତା ନେବା ଶ୍ରେସ୍କର ହୁଅନ୍ତି ।       

୦୫ ଅକ୍ଟୋବର ୨୦୧୫
(ଲେଖକ ସଶସ୍ତ୍ର ପୁଲିସ ବଳ ନେପାଳ, ଅତିରିକ୍ତ ମହାନିରୀକ୍ଷକ ହୁଏନ୍ତି )

This is Oriya language from South-Eastern state of Orissa, India. 


Dr. Tamang often writes articles, features and research papers on administrative and management issues of disaster, crimes against women and children, good governance, international humanitarian law, Mines/UXO awareness, security and safety matters literature. He  has  Post  Graduate Degree  in  International  Humanitarian  Law,  Masters  Degree  in  Disaster Mitigation, Masters Degree in Criminology, M Phil in Police Administration and PhD in Public Administration. In addition, various security genre professional trainings home and abroad, seminars and United Nations varied three peacekeeping field missions experience; and a number of conflict management courses in the US, Europe, Asia and Africa; are plus points for his successful academic aspects of career. More of his articles are at: http://drkktamang.blogspot.com/